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वरुण ने जमानत याचिका वापस ली

नई दिल्ली (भाषा), शुक्रवार, 27 मार्च 2009



भारतीय जनता पार्टी के नेता वरुण गाँधी ने दिल्ली उच्च न्यायालय से अपनी जमानत याचिका शुक्रवार को वापस ले ली जिसके तहत पहले उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत प्रदान की गई थी।

उल्लेखनीय है कि वरुण के खिलाफ उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज है। इस मामले में 29 वर्षीय वरुण गाँधी के जमानत याचिका वापस लेने के साथ ही उच्च न्यायालय द्वारा उनकी गिरफ्तारी पर रोक संबंधी आदेश समाप्त हो जाता है।

अदालत के समक्ष हाजिर हुए वरुण के वकील ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा चुनावी भाषण के संबंध में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करने के बाद वह अपनी अग्रिम जमानत अर्जी वापस लेना चाहते हैं।

वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को देखते हुए हम अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा वरुण की याचिका पर आपत्ति नहीं उठाए जाने के कारण न्यायमूर्ति रेवा क्षेत्रपाल ने उन्हें अपनी अर्जी वापस लेने की अनुमति प्रदान की।

अदालत ने कहा मामले के गुणदोष पर जाए बिना याचिका खारिज की जाती है क्योंकि इसे वापल ले लिया गया है।

इसके साथ ही अदालत द्वारा बीस मार्च को वरुण गाँधी की गिरफ्तारी पर लगाई गई रोक हट गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भड़काऊ साम्प्रदायिक भाषण देने के मामले में वरुण गाँधी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर तब तक रोक लगा दी थी जब तक कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने संबंधी उनकी याचिका पर फैसला नहीं कर लेता।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को वरुण की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने पीलीभीत में कथित मुस्लिम विरोधी भाषण के लिए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की माँग की थी।

अपनी याचिका में वरुण ने उस प्राथमिकी को चुनौती दी थी जो 17 मार्च को बरखेड़ा पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153 और धारा 188 के तहत उनके खिलाफ दर्ज की गई थी।

मौजूदा धाराओं में भाजपा नेता वरुण गाँधी को अधिकतम तीन वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं।

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